Bhagvad Gita

अध्याय 4: ज्ञान और कर्म का साथ

अध्याय 4 में कृष्ण बताते हैं कि ज्ञान और कर्म एक दूसरे के पूरक हैं। ज्ञान से स्पष्टता मिलती है। कर्म से अनुभव। दोनों मिलकर बुद्धिमत्ता बनाते हैं।

कृष्ण कहते हैं कि गुरु और अनुभवी लोग इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे रास्ता दिखाते हैं। अर्जुन का सीखने का भाव महत्वपूर्ण कदम बन जाता है।

युवा भी मेंटर या शिक्षक से बहुत कुछ सीखते हैं। इससे भ्रम कम होता है और निर्णय परिपक्व होते हैं।

कृष्ण यह भी बताते हैं कि ज्ञान संदेह मिटाता है। बार बार मन बदलने की आदत धीरे धीरे शांत होती है।

अध्याय 4 दर्शाता है कि ज्ञान जीवन से जुड़ा हुआ है, अलग नहीं।

Panditjee
Author: Panditjee

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *