अध्याय 6: मन का अभ्यास
अध्याय 6 मन पर केंद्रित है। कृष्ण कहते हैं कि मन मित्र भी बन सकता है और बाधा भी, यह इस पर निर्भर है कि उसे कैसे प्रशिक्षित किया जाए।
अर्जुन स्वीकार करता है कि मन को साधना मुश्किल लगता है। कृष्ण कहते हैं कि धीरे धीरे अभ्यास और संलग्नता कम करने से मन शांत होता है।
युवा भी मन की उथल पुथल से परेशान रहते हैं। सोशल मीडिया, तुलना, भविष्य का डर मन को बेचैन बनाता है।
कृष्ण का मार्गदर्शन नियमित, हल्के अभ्यास की प्रेरणा देता है। धीरे धीरे ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है।
अध्याय 6 बताता है कि शांत मन समझदार जीवन की नींव है।
