अध्याय 12: सरल और सच्ची भक्ति का मार्ग
अध्याय 12 भक्ति की व्यावहारिक परिभाषा देता है। भक्ति रीतियों तक सीमित नहीं है। यह सरल विश्वास, दयालुता, ईमानदारी और समर्पण का भाव है।
कृष्ण बताते हैं कि शांत, विनम्र और धैर्यवान व्यक्ति भक्त कहलाता है।
युवा इसे अपने संबंधों में देख सकते हैं। बातचीत में धैर्य, मतभेद में नम्रता, वादों में सच्चाई। यही जीवन को सुंदर बनाता है।
अध्याय 12 करुणामय जीवन का मार्ग दिखाता है।
