अध्याय 11: व्यापक दृष्टि
अध्याय 11 में कृष्ण अर्जुन को विराट रूप दिखाते हैं। अर्जुन देखता है कि पूरी सृष्टि एक ही प्रवाह में चल रही है। हर घटना बड़े क्रम का हिस्सा है।
यह दृष्टि अर्जुन के डर को कम करती है क्योंकि वह समझता है कि जीवन लगातार बदलता रहता है।
युवा भी एक कदम पीछे हटकर जब जीवन को दूर से देखते हैं, समस्याएँ छोटी लगने लगती हैं। यह अध्याय विनम्रता और समझ देता है।
