अध्याय 13: स्वयं और दुनिया को समझना
अध्याय 13 आत्मा और शरीर मन को अलग पहचानने की शिक्षा देता है। शरीर और मन अनुभवों का क्षेत्र हैं। आत्मा वह है जो अनुभव करती है।
यह समझ निर्णयों को साफ बनाती है।
युवा यदि विचारों और भावनाओं को अपनी पहचान न मानकर अनुभव मानें, तो प्रतिक्रियाएँ हल्की हो जाती हैं और समझ बढ़ती है।
अध्याय 13 आत्मज्ञान की नींव देता है।
