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त्रयोदशी तिथि पर महादेव की पूजा और काशी विश्वनाथ मंदिर की मंगला आरती

सनातन धर्म में त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को समर्पित होती है। इस दिन भगवान शिव और देवी मां पार्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इसके साथ ही भक्तजन इस दिन त्रयोदशी तिथि का व्रत भी रखते हैं। यह व्रत जीवन में आने वाली सभी प्रकार की परेशानियों को दूर करता है और सुख और सौभाग्य में वृद्धि करता है।

धार्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि जो व्यक्ति महादेव के शरण में रहते हैं, उनकी जिंदगी में किसी चीज़ की कमी नहीं होती। हमेशा शांति और सुख का अनुभव होता है। इसके लिए भक्तगण भगवान शिव की कठिन साधना और भक्ति करते हैं, विशेष रूप से इस शुभ दिन पर पूजा और आरती करते हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर का महत्व

उत्तर प्रदेश के बनारस शहर में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसे बनारस की नगरी, यानी भगवान शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। यह मंदिर पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित है और इसे एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।

मान्यता है कि अगर कोई गंगा स्नान करके काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव और मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं और गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं।

मंगला आरती का समय

काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होती है, जो सुबह 3 बजे से 4 बजे तक होती है। यह आरती सूर्योदय से डेढ़ घंटे पहले की जाती है, जिसे ब्रह्म मुहूर्त कहा जाता है। यह समय अत्यंत शुभ होता है, जब अंधेरा समाप्त होता है और सभी जीव-जंतु जागृत हो जाते हैं।

इस समय में मंगला आरती करने से जीवन में मंगल का आगमन होता है और सभी प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं। भक्तों को मंगला आरती में शामिल होने के लिए रात 3 बजे तक मंदिर में प्रवेश की अनुमति होती है।

मंगला आरती का महत्व

धार्मिक दृष्टि से मंगला आरती करने से जीवन में मंगलमय परिवर्तन होते हैं। यह आरती भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। उनकी कृपा से सुख, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है और भक्तगण इस आरती में सम्मिलित होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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Author: Panditjee

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