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हनुमान जी ने क्यों लिया पंचमुखी अवतार जानिए हर मुख का आध्यात्मिक महत्व
दिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 12 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से समस्त दुखों से मुक्ति और हर संकट का नाश होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार क्यों लिया था? आइए इस पौराणिक रहस्य को विस्तार से समझते हैं।
अहिरावण के वध से जुड़ी है पंचमुखी अवतार की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब श्रीराम और रावण के बीच लंका युद्ध चल रहा था, तब रावण को एहसास हुआ कि उसकी सेना पराजय की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उसने अपने भाई अहिरावण से सहायता मांगी। अहिरावण माता भवानी का परम भक्त था और उसे गहन तांत्रिक विद्याओं का ज्ञान था। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग कर राम की सेना को निद्रित कर दिया और श्रीराम तथा लक्ष्मण को बंधक बनाकर पाताल लोक ले गया।
पाताल लोक में अहिरावण ने एक यज्ञ की योजना बनाई जिसमें श्रीराम और लक्ष्मण की बलि दी जानी थी। अहिरावण ने यज्ञ के लिए पाँच दिशाओं में पाँच दीपक प्रज्वलित किए और उसे वरदान प्राप्त था कि जब तक कोई उन पाँचों दीपकों को एक साथ नहीं बुझाता, तब तक उसका वध संभव नहीं है।
इस संकट को देखकर हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया ताकि वह एक साथ पांचों दिशाओं में दीपकों को बुझा सकें। उन्होंने यह कार्य सफलतापूर्वक किया और अहिरावण का वध कर श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया।
पंचमुखी हनुमान के हर मुख का विशेष महत्व
हनुमान जी के पंचमुखी रूप का प्रत्येक मुख एक दिशा और विशेष शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह रूप केवल एक युद्ध कौशल नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक शक्तियों और विभिन्न स्वरूपों का समन्वय भी था।
वानर मुख (पूर्व दिशा)
यह हनुमान जी का मूल स्वरूप है। इसे पूर्व दिशा का रक्षक माना जाता है और यह रूप शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला माना गया है।
गरुड़ मुख (पश्चिम दिशा)
इस मुख का संबंध जीवन की बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने से है। यह मुख भक्त को भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में संतुलन देता है।
वराह मुख (उत्तर दिशा)
वराह मुख दीर्घायु और स्वास्थ्य का प्रतीक है। इसकी पूजा से दीर्घ जीवन और रोगों से रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नृसिंह मुख (दक्षिण दिशा)
नृसिंह अवतार रक्षक रूप में पूजे जाते हैं। यह मुख जीवन में आने वाले मानसिक तनाव और भय को दूर करता है।
अश्व मुख (ऊर्ध्व दिशा)
इस मुख की उपासना से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हनुमान जी का पंचमुखी रूप न केवल एक चमत्कारी शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी विवेक, साहस और भक्ति के माध्यम से समाधान संभव है। पंचमुखी हनुमान की आराधना संकटों के नाश और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति का मार्ग है। हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर पंचमुखी हनुमान के स्वरूप की आराधना विशेष फलदायक मानी जाती है।