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काशी विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती कब होती है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
सोमवार का दिन महादेव को समर्पित
सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है। शिव पुराण में इस व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है। इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र भी मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के लिए सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने की सलाह देते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर का महत्व
काशी विश्वनाथ मंदिर को भोलेनाथ की नगरी भी कहा जाता है। यह मंदिर काशी के गंगा नदी के तट पर स्थित है और इसका इतिहास बहुत पुराना है। काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पूजा करने से सभी दुख, संकट, रोग, और दोष समाप्त हो जाते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में हर दिन मंगला और सप्तर्षि आरती के अलावा भोग आरती का आयोजन भी किया जाता है।
भोग आरती का समय
काशी विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती रोजाना रात 9 बजे से लेकर 10 बजकर 15 मिनट तक की जाती है। यह आरती मंदिर में चार बार की जाने वाली आरतियों में से आखिरी आरती होती है। इस आरती के दौरान भगवान शिव को भोग (प्रसाद) अर्पित किया जाता है। भक्तगण इस आरती में शामिल होने के लिए रात 8:30 बजे तक मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं। विशेष रूप से 12 साल तक के बच्चों को इस आरती में प्रवेश मुफ्त होता है।
भोग आरती का धार्मिक महत्व
काशी विश्वनाथ मंदिर में भोग आरती का आयोजन भगवान शिव और मां पार्वती के प्रति भक्तों की श्रद्धा और सम्मान को प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस आरती में अन्नपूर्णा देवी और भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में अन्न और धन की कमी नहीं होती है। साथ ही, जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। भोग आरती में भाग लेने से व्यक्ति के सभी दुख समाप्त होते हैं और मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं। भक्तगण इस आरती का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में काशी आते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर की भोग आरती का आयोजन विशेष महत्व रखता है। यह आरती न केवल भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव है, बल्कि भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति का अवसर भी प्रदान करती है। भोग आरती के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से जीवन में अन्न और धन की कमी नहीं रहती, और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।