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प्रदोष व्रत 2025 की तिथि पूजा विधि महत्व और लाभ
प्रदोष व्रत, जिसे ‘प्रदोषम्’ भी कहा जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक विशेष व्रत है। यह व्रत हर मास के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है—एक बार कृष्ण पक्ष में और दूसरी बार शुक्ल पक्ष में। यह व्रत विशेष रूप से संध्या काल में किया जाता है, जब दिन और रात का संगम होता है, और माना जाता है कि इस समय भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
अगला प्रदोष व्रत
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तिथि: शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025
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पूजा का समय (वैशाख प्रदोष): 25 अप्रैल, शाम 6:47 बजे से रात 9:02 बजे तक
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अगला व्रत: 9 मई 2025, शुक्रवार
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
‘प्रदोष’ का अर्थ है संध्या का समय, जो दिन और रात्रि के बीच की विशेष वेला होती है। इस समय भगवान शिव अपने भक्तों को शीघ्र प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह व्रत श्रद्धा, संयम और ध्यान का प्रतीक है तथा आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाने वाला माना गया है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
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संध्या से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की विधिवत पूजा करें।
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पूजन स्थल पर कलश की स्थापना करें और उसमें जल भरकर दरभा घास पर रखें।
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शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद आदि से अभिषेक करें और बिल्व पत्र अर्पित करें।
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प्रदोष व्रत कथा सुनें या शिव पुराण का पाठ करें।
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महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
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अंत में कलश का जल ग्रहण करें और भस्म को मस्तक पर लगाएं।
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दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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अनेक भक्त इस दिन शिव मंदिर जाकर रात्रिकालीन आरती में भाग लेते हैं।
प्रदोष व्रत के लाभ (स्कंद पुराण अनुसार)
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सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति
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मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मिक विकास
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पापों से मुक्ति और शिव कृपा का लाभ
प्रदोष व्रत के प्रकार और उनके विशेष लाभ
| दिन | व्रत का नाम | विशेष लाभ |
|---|---|---|
| सोमवार | सोम प्रदोष | सकारात्मक सोच, इच्छाओं की पूर्ति |
| मंगलवार | भौम प्रदोष | रोगों से मुक्ति, स्वास्थ्य और समृद्धि |
| बुधवार | सौम्य वार प्रदोष | बुद्धि, ज्ञान और मनोकामना सिद्धि |
| गुरुवार | गुरुवार प्रदोष | संकट नाश, पितृ आशीर्वाद |
| शुक्रवार | भृगु वार प्रदोष | संतोष, सफलता और नकारात्मकता से मुक्ति |
| शनिवार | शनि प्रदोष | धन, पदोन्नति और शुभ अवसरों की प्राप्ति |
| रविवार | भानु वार प्रदोष | दीर्घायु, मानसिक शांति और सौभाग्य |
प्रदोष व्रत आस्था, अनुशासन और भक्ति का एक गहरा प्रतीक है, जो न केवल सांसारिक सुख-सुविधाएं देता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी प्रेरित करता है।