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महातारा जयंती का महत्व पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से जुड़े विशेष ज्योतिषीय संयोग
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाने वाला चैत्र नवरात्रि पर्व विशेष रूप से मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित होता है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की उपासना और व्रत रखते हैं, जिससे वे आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करते हैं और उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना करने से साधक के समस्त दुखों और कष्टों का निवारण होता है तथा उसे जीवन के सभी सुख प्राप्त होते हैं।
इन्हीं पूजनीय स्वरूपों में से एक हैं मां महातारा, जिनकी जयंती हर वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी को मनाई जाती है। यह दिन देवी उपासकों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए, इस पावन पर्व के महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधान के बारे में विस्तार से जानते हैं।
महातारा जयंती की तिथि और शुभ मुहूर्त
हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महातारा जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष नवमी तिथि का आरंभ 5 अप्रैल को शाम 7:26 बजे होगा और यह 6 अप्रैल को शाम 7:22 बजे समाप्त होगी। सनातन परंपरा के अनुसार, तिथि की गणना सूर्योदय के आधार पर की जाती है, इसलिए इस वर्ष महातारा जयंती का पर्व 6 अप्रैल को रामनवमी के साथ मनाया जाएगा।
महातारा जयंती पर बनने वाले शुभ योग
ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार महातारा जयंती के अवसर पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा को और भी प्रबल बना देंगे। इस दिन सुकर्मा योग, रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में मां महातारा की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
महातारा जयंती पर महत्वपूर्ण पंचांग विवरण
– सूर्योदय: सुबह 6:05 बजे
– सूर्यास्त: शाम 6:42 बजे
– चंद्रोदय: दोपहर 12:44 बजे
– चंद्रास्त: रात्रि 3:00 बजे
– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 बजे से 5:20 बजे तक
– विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:20 बजे तक
– गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:41 बजे से 7:03 बजे तक
– निशिता मुहूर्त: रात्रि 12:00 बजे से 12:46 बजे तक
महातारा जयंती का महत्व और पूजा विधि
महातारा जयंती देवी उपासना का अत्यंत पावन अवसर है। इस दिन साधक मां महातारा की आराधना करके आध्यात्मिक शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां महातारा की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। उन्हें लाल पुष्प, अक्षत, कुमकुम और नैवेद्य अर्पित करें। विशेष रूप से इस दिन देवी को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं।
मां महातारा की पूजा साधकों को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती है। जो श्रद्धालु श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें देवी कृपा प्राप्त होती है और उनके सभी कार्य सफल होते हैं।