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अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का महत्व और शुभ मुहूर्त

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियां विशेष महत्व रखती हैं। अष्टमी के दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है, जबकि नवमी तिथि मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित होती है। इन दोनों तिथियों पर कन्या पूजन का आयोजन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कन्याएं मां दुर्गा का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए कन्या पूजन, मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्तिभाव को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। यह माना जाता है कि नवरात्रि की इस पावन अवधि में कन्याओं की पूजा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती हैं। इसके साथ ही, कन्या पूजन से घर में सुख-समृद्धि का वास भी होता है।

अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान अष्टमी या महाअष्टमी 5 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित है:

कन्या पूजन मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक

नवमी पर कन्या पूजन मुहूर्त

नवरात्रि की नवमी तिथि 6 अप्रैल 2025 को है, जो राम नवमी के साथ मेल खाती है। इस दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त निम्नलिखित रहेगा:

कन्या पूजन मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक

कन्या पूजन के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

कन्या पूजन के दिन, आदर और श्रद्धा के साथ कन्याओं को अपने घर बुलाएं, साथ ही एक बालक (लांगुरा) को भी आमंत्रित करें। उनके पांव धोकर पूजा करें, फिर उन्हें स्वादिष्ट भोजन परोसें। अंत में, उन्हें कुछ उपहार और दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा करें। इसके साथ ही, नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथियों पर माता रानी का ध्यान करते हुए उनके स्तुति मंत्र का जप करें। इससे आपको मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

दुर्गा स्तुति मंत्र:

“या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता।।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”

अष्टमी और नवमी तिथियों पर कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता लाती है। इन विशेष मुहूर्तों का पालन करने से न केवल भक्तों को आशीर्वाद मिलता है, बल्कि घर में समृद्धि और शांति भी बनी रहती है।

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Author: Panditjee

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