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भानु सप्तमी 2025: सूर्य आराधना से रोग, दोष और दरिद्रता से मुक्ति
भानु सप्तमी 2025 की तिथि: भानु सप्तमी इस वर्ष 25 मई 2025, रविवार को मनाई जाएगी।
भानु सप्तमी क्या है?
भानु सप्तमी, जिसे सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में सूर्य भगवान को समर्पित एक विशेष तिथि है। यह व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है। जब सप्तमी रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे “भानु सप्तमी” कहा जाता है। “भानु” सूर्य का ही एक नाम है। यह दिन सूर्य देव के पूजन और उनके तेज से रोग, पाप और दरिद्रता को दूर करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व:
सूर्य आराधना का सर्वोत्तम दिन:
भानु सप्तमी पर सूर्यदेव की आराधना करने से आयु, आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है। इसे आयुर्वेद में भी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
रोग और ग्रह दोष निवारण:
सूर्य ग्रह कमजोर होने पर व्यक्ति को नेत्र रोग, आत्मबल की कमी और जीवन में अपयश मिल सकता है। इस दिन का व्रत और सूर्य अर्घ्य सूर्य से जुड़े दोषों को शांत करता है।
पित्र दोष से मुक्ति:
ज्योतिष के अनुसार, सूर्य पितरों का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। भानु सप्तमी पर पूजन और पित्रों का तर्पण करने से पित्र दोष से मुक्ति मिलती है।
विवाह, करियर और सम्मान में वृद्धि:
सूर्य आत्मबल, नेतृत्व और सरकारी नौकरी से जुड़ा ग्रह है। इस दिन व्रत करने से जीवन में आत्मविश्वास, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
पूजन विधि संक्षेप में:
• सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
• तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
• सूर्य मंत्र – “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का 108 बार जप करें।
• सूर्य चालीसा या आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें।
• दिनभर सात्त्विक आहार लें और सूर्यदेव को बार-बार नमन करें।
भानु सप्तमी का पालन क्यों करें?
जो व्यक्ति लगातार बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, या जिन्हें पित्र दोष, नेत्र संबंधी कष्ट या आत्मबल में कमी है, उनके लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावकारी है। यह आत्मिक शक्ति, तेज और सम्मान में वृद्धि के लिए एक श्रेष्ठ दिन है।
चेतावनी :
सूर्य को जल अर्पण करते समय कभी नंगे आंखों से सूर्य को न देखें। विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही किसी विशेष दोष की शांति हेतु व्रत करें।