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विकट संकष्टी चतुर्थी: ग्रह दोष मिटाएं, सुख-शांति पाएं
िकट संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि: 18 मई 2025, रविवार चंद्रोदय समय: रात 08:58 बजे (स्थान अनुसार भिन्न हो सकता है)
क्या है विकट संकष्टी चतुर्थी?
संकष्टी चतुर्थी भगवान श्रीगणेश को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आता है। जब यह व्रत रविवार को आता है, तो इसे ‘विकट संकष्टी चतुर्थी’ कहा जाता है। ‘विकट’ भगवान गणेश के 21 स्वरूपों में से एक माना जाता है, जो संकटों को हरने वाले रूप हैं।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व:
गणेश जी की विशेष कृपा: इस दिन व्रत और पूजन करने से जीवन के सभी “विकट” यानी कठिन संकट दूर होते हैं।
चंद्रमा की शांति: चतुर्थी तिथि चंद्र दोष शांति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जो जातक चंद्रमा से प्रभावित हैं या जिन्हें मानसिक तनाव रहता है, उनके लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी होता है।
मंगल ग्रह का प्रभाव: ज्योतिष में गणपति को मंगल ग्रह से भी जोड़ा जाता है। इसलिए यह व्रत मंगलदोष, कोर्ट केस, विवाद या किसी भी प्रकार की बाधा से छुटकारा पाने में सहायक होता है।
कामना पूर्ति: संतान प्राप्ति, करियर में सफलता, विवाह में आ रही रुकावट या किसी भी विशेष कामना की पूर्ति हेतु यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पूजा विधि संक्षेप में:
• सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
• दिनभर निर्जला या फलाहारी व्रत रखें।
• शाम को चंद्रोदय के बाद गणेश जी की पूजा करें।
• दूर्वा, लड्डू और 21 बेलपत्र से गणेश पूजन करें।
• चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें।
क्यों रखें विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत?
यह व्रत जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने और गणेश जी की कृपा प्राप्त करने का सिद्ध मार्ग है। ज्योतिष के अनुसार यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना गया है जिनकी कुंडली में ग्रहदोष, विशेषकर चंद्र और मंगल संबंधी बाधाएं हों।