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चैत्र पूर्णिमा 2025 पर भगवान सत्यनारायण की पूजा में करें यह आरती सभी कार्य होंगे सफल
चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और भक्ति भाव से सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। सत्यनारायण व्रत का उल्लेख स्कंद पुराण में किया गया है, जिसमें भगवान विष्णु स्वयं नारद मुनि को इस व्रत की महत्ता बताते हैं।
सत्यनारायण व्रत की आध्यात्मिक महत्ता
सत्यनारायण भगवान को सच्चाई और धर्म का प्रतीक माना जाता है। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से इनकी पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है। माना जाता है कि सत्यनारायण की पूजा से पापों का नाश होता है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है।
श्री सत्यनारायण जी की आरती
जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा॥
रत्न जड़ित सिंहासन,
अद्भुत छवि राजै।
नारद करत निराजन,
घंटा ध्वनि बाजै॥
प्रकट भये कलि कारण,
द्विज को दर्श दियो।
बूढ़ा ब्राह्मण बनकर,
कंचन महल कियो॥
दुर्बल भील कठारो,
जिन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा,
तिनकी विपत्ति हरी॥
वैश्य मनोरथ पायो,
श्रद्धा तज दीन्ही।
सो फल भोग्यो प्रभुजी,
फिर स्तुति कीन्हीं॥
भाव भक्ति के कारण,
छिन-छिन रूप धरयो।
श्रद्धा धारण कीन्हीं,
तिनको काज सरयो॥
ग्वाल-बाल संग राजा,
वन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीन्हों,
दीनदयाल हरी॥
चढ़त प्रसाद सवायो,
कदली फल, मेवा।
धूप दीप तुलसी से,
राजी सत्यदेवा॥
श्री सत्यनारायण जी की आरती,
जो कोई नर गावै।
ऋद्धि-सिद्धि सुख-संपत्ति,
सहज रूप पावे॥
जय लक्ष्मी रमणा,
स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा॥
सत्यनारायण भगवान की पूजा विशेषकर पूर्णिमा तिथि को करने से साधक के जीवन में शांति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। चैत्र पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक आरती करने से सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। यह आरती भगवान की कृपा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है, जिससे जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।