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काशी विश्वनाथ मंदिर की शयन आरती का समय और धार्मिक महत्व

प्राचीन नगरी काशी, जिसे बाबा विश्वनाथ की नगरी कहा जाता है, सनातन संस्कृति का केंद्र है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर न केवल धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की आस्था का भी प्रमुख स्थान है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए इस मंदिर में पहुंचते हैं।

प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत का आयोजन किया जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। इस दिन का व्रत साधक के जीवन में मंगल लाता है और समस्त दुखों तथा कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

काशी गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन और पवित्र नगर है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यहां भगवान शिव को ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली थी, जिसके पश्चात उन्होंने इस नगरी को अपना निवास स्थान बना लिया। यहीं स्थित है काशी विश्वनाथ मंदिर, जिसे शिव भक्तों के लिए सबसे पावन स्थलों में से एक माना जाता है।

मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन से हर मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पांच समय आरती की जाती है, जिनमें अंतिम आरती को शयन आरती कहा जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में शयन आरती का समय

शयन आरती प्रतिदिन रात्रि 10:30 बजे से 11:00 बजे तक की जाती है। यह आरती मध्यरात्रि से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व की जाती है। इस आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को 300 रुपये शुल्क देना होता है, हालांकि 12 वर्ष तक के बच्चों को इसमें नि:शुल्क प्रवेश की अनुमति है।

शयन आरती का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि शयन आरती में भाग लेने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह आरती भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाओं को दूर करती है तथा सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि करती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आरती में सम्मिलित होकर बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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Author: Panditjee

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