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वैशाख माह की शुरुआत से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार दान और पूजा से मिलेगा विशेष फल
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। इसके अगले दिन से वैशाख माह की शुरुआत होगी, जो धर्म, पुण्य और दान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन मास में भगवान विष्णु की विशेष रूप से पूजा की जाती है और जल, अन्न, वस्त्र व धन का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यह महीना न केवल आध्यात्मिक उन्नति का अवसर देता है, बल्कि जीवन में समृद्धि और सफलता का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
वैशाख माह 2025 की तिथि और प्रारंभ
वैदिक गणनाओं के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 12 अप्रैल को सुबह 5:52 बजे होगा, और यह तिथि 14 अप्रैल को सुबह 8:25 बजे समाप्त होगी। पंचांग पर आधारित मान्यता के अनुसार, 13 अप्रैल 2025 से वैशाख मास की विधिवत शुरुआत मानी जाएगी।
वैशाख माह में दान का महत्व
इस माह में भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि वैशाख में किए गए दान से धन लाभ, कर्जमुक्ति और जीवन में स्थिरता के योग बनते हैं। यह माह आत्मिक शुद्धि के साथ-साथ भौतिक समृद्धि का भी संकेतक है।
भगवान शिव को प्रसन्न करने का शुभ अवसर
वैशाख मास में सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायक माना गया है। इस दिन स्नान के पश्चात विधिपूर्वक रुद्राभिषेक करें और भगवान को खीर, फल तथा पुष्प अर्पित करें। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय से शिव कृपा प्राप्त होती है और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
वैशाख माह में इन बातों का रखें ध्यान
- इस माह तामसिक भोजन से परहेज करें।
- विवाद, नकारात्मक विचार और दूसरों के प्रति द्वेष से बचें।
- पूजा करते समय काले वस्त्र न पहनें।
- घर में स्वच्छता बनाए रखें, क्योंकि देवी-देवताओं का वास पवित्र स्थानों पर ही होता है।
विष्णु मंत्र का जाप
वैशाख मास में पूजा के समय निम्न विष्णु मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है:
“शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥”
वैशाख मास न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। इस महीने में श्रद्धा, संयम और सेवा भाव से किए गए कार्य व्यक्ति को आध्यात्मिक बल, धन की प्राप्ति और कर्मों में सुधार प्रदान करते हैं। यदि उचित विधि से पूजन और दान किया जाए, तो वैशाख मास साधक के जीवन को सुख, शांति और सफलता से भर सकता है।