Blog
नवरात्रि में कन्या पूजन का धार्मिक महत्व संपूर्ण पूजन विधि और शुभ फल प्राप्ति के उपाय
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन अथवा कंजक पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूजन किए बिना नवरात्रि व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता। कन्या पूजन करने से साधक को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। इस पूजन के लिए 7, 9 अथवा 11 कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है और विधि-विधान से उनका पूजन कर भोजन कराया जाता है। साथ ही कन्याओं को उपहार और दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है।
कन्या पूजन की विधि
1. कन्याओं का स्वागत एवं पूजन
– आमंत्रित कन्याओं के चरण धोकर उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं।
– प्रत्येक कन्या के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
– मां दुर्गा का प्रतीक मानते हुए कन्याओं को चुनरी ओढ़ाएं और ससम्मान पूजन करें।
2. भोग अर्पण
– कन्याओं को हलवा, पूड़ी और चने का भोग अर्पित करें।
– नारियल भी प्रसाद के रूप में भेंट किया जा सकता है।
– इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भोजन पूरी तरह से सात्विक और शुद्ध होना चाहिए।
3. उपहार और दक्षिणा प्रदान करें
– कन्याओं को शृंगार सामग्री जैसे चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर आदि उपहारस्वरूप दें।
– शिक्षा से संबंधित वस्तुएं जैसे पेंसिल, कॉपी, बैग आदि भी भेंट की जा सकती हैं।
– पूजन के पूर्ण होने पर कन्याओं को दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
4. सम्मानपूर्वक कन्याओं को विदा करें
– कभी भी कन्याओं को अपने घर से खाली हाथ विदा न करें।
– उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करने से पूर्व उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
– माता रानी के जयकारों के साथ उन्हें विदा करें और इस बात का ध्यान रखें कि कन्या पूजन के तुरंत बाद घर की साफ-सफाई न करें।
कन्या पूजन का आध्यात्मिक महत्व
कन्या पूजन नवरात्रि की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है। इस पूजन से साधक को आध्यात्मिक और दैविक आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है तथा सभी कष्टों का निवारण होता है।
नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से कन्या पूजन करने से साधक को माता रानी की कृपा प्राप्त होती है और उसका व्रत पूर्ण फलदायी बनता है।