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नवरोज 2025 पारसी नववर्ष का उत्सव और उसकी परंपराएं

नवरोज का अर्थ और महत्व

नवरोज शब्द दो पारसी शब्दों ‘नव’ और ‘रोज’ से मिलकर बना है, जहां ‘नव’ का मतलब है- नया और ‘रोज’ का मतलब है- दिन। नवरोज के दिन पारसी नववर्ष की शुरुआत होती है और इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर वसंत ऋतु के पहले दिन को दर्शाता है, साथ ही यह सर्दियों के अंत और गर्मी के आगमन का प्रतीक भी है।

नवरोज का संकेत

पारसी समुदाय में नवरोज वसंत ऋतु के पहले दिन की शुरुआत को दर्शाता है और सर्दियों के समाप्त होने का संकेत देता है। हर साल वसंत विषुव के उत्सव में लाखों लोग भाग लेते हैं और इसे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। 2025 के लिए, पारसी कैलेंडर के अनुसार वसंत ऋतु का समापन 20 मार्च 2025 को सुबह 5 बजकर 01 मिनट पर होगा। नवरोज का पर्व मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, अजरबैजान जैसे देशों में मनाया जाता है।

नवरोज कैसे मनाया जाता है

पारसी नववर्ष के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर अपने घरों की सफाई करते हैं और मुख्य द्वार को सजाते हैं। इसके साथ ही ‘हफ़्त सिन टेबल’ (Haft Sin Table) की स्थापना की जाती है, जिस पर सात विशेष वस्तुएं रखी जाती हैं: सेब, सरसों का तेल, पानी, दही, सौंफ, अखरोट, प्याले में पानी और सोने की मछली। इन वस्तुओं का विशेष महत्व है और यह नवरोज की शुभकामनाओं का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके बाद लोग नए साल में खुशहाली, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इस दिन घरों में पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और दोस्तों व परिवार को बांटे जाते हैं। इस दिन एक-दूसरे को गिफ्ट्स देने की परंपरा भी है।

13 दिनों तक चलने वाला पर्व

नवरोज का उत्सव लगभग 13 दिन तक चलता है। इस दौरान पारंपरिक खेल, संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं, जो इस दिन को और भी खास बना देती हैं। लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ समय बिताते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। उत्सव का अंतिम दिन, 13वां दिन, ‘सिज़दाह बेदार’ के रूप में मनाया जाता है, जब लोग प्रकृति के बीच जाकर समय बिताते हैं। पारसी मान्यता के अनुसार, नवरोज का यह पर्व जीवन के नवीनीकरण और उत्साह का प्रतीक है।

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Author: Panditjee

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