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होलिका दहन की पवित्र अग्नि के समक्ष इन मंत्रों का जाप करने से दूर होंगे समस्त कष्ट

होलिका दहन हिंदू संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। यह उत्सव प्रतिवर्ष होली से एक दिन पूर्व मनाया जाता है। वर्ष 2025 में, होलिका दहन का आयोजन 13 मार्च को किया जाएगा, जिसके अगले दिन अर्थात 14 मार्च को रंगों का पर्व होली मनाया जाएगा। यह अनुष्ठान फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात्रि में संपन्न होता है, जो प्रायः मार्च माह में आती है।

इस पावन अवसर पर भगवान नरसिंह की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है। श्रद्धालु स्नान करने के पश्चात सूर्यदेव को जल अर्पित करें और तत्पश्चात भगवान नरसिंह का ध्यान करें। देसी घी का दीप प्रज्वलित कर पुष्पमाला, फल, अक्षत, चंदन आदि समर्पित करें। इसके पश्चात भगवान नरसिंह के 108 दिव्य नामों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भगवान नरसिंह के 108 पवित्र नाम

ॐ नरसिंहाय नमः
ॐ नराय नमः
ॐ नारस्रष्ट्रे नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ नवाय नमः
ॐ नवेतराय नमः
ॐ नरपतये नमः
ॐ नरात्मने नमः
ॐ नरचोदनाय नमः
ॐ नखभिन्नस्वर्णशय्याय नमः
ॐ नखदंष्ट्राविभीषणाय नमः
ॐ नादभीतदिशानागाय नमः
ॐ नन्तव्याय नमः
ॐ नखरायुधाय नमः
ॐ नादनिर्भिन्नपाद्माण्डाय नमः
ॐ नयनाग्निहुतासुराय नमः
ॐ नटत्केसरसञ्जातवातविक्षिप्तवारिदाय नमः
ॐ नलिनीशसहस्राभाय नमः
ॐ नतब्रह्मादिदेवताय नमः
ॐ नभोविश्वम्भराभ्यन्तर्व्यापिदुर्वीक्ष्यविग्रहाय नमः

(आगे के नाम उसी क्रम में जारी रखें)

होलिका दहन की रात्रि में इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है एवं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि जीवन में समृद्धि एवं शांति भी प्रदान करता है।

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Author: Panditjee

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