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प्रदोष व्रत: आज के दिन पढ़ें इस कथा का पाठ, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल
प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ माना जाता है, जो विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और हर महीने में दो बार पड़ता है। इस साल, यह व्रत 11 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष महत्व है, जिससे सभी शिव भक्तों को इस व्रत को पालन करने की सलाह दी जाती है।
प्रदोष व्रत का पुण्य फल प्राप्त करने के लिए व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह कथा इस प्रकार है:
फाल्गुन प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन समय में अंबापुर गांव में एक ब्राह्मणी रहती थी, जिसका पति निधन हो चुका था। वह भिक्षाटन करके अपना जीवन यापन करती थी। एक दिन भिक्षा मांगते हुए वह दो छोटे बच्चों से मिली, जो अकेले थे। बच्चों को देख वह चिंतित हो गई और सोचा कि इनका माता-पिता कौन हैं। उसने दोनों बच्चों को अपने घर ले आया। कुछ समय बाद, जब बच्चे बड़े हो गए, तो ब्राह्मणी उन्हें लेकर ऋषि शांडिल्य के पास गई और उनसे इन बच्चों के माता-पिता के बारे में पूछा।
ऋषि शांडिल्य ने बताया, “ये दोनों बच्चे विदर्भ नरेश के राजकुमार हैं। गंदर्भ नरेश के आक्रमण के कारण इनका राजपाट छीन लिया गया था। इसलिए यह दोनों राजपाट से वंचित हो गए।”
यह सुनकर ब्राह्मणी ने ऋषि से पूछा, “क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे इनका राजपाट पुनः प्राप्त हो सके?”
ऋषि शांडिल्य ने उन्हें प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। इसके बाद ब्राह्मणी और दोनों राजकुमारों ने प्रदोष व्रत का पालन श्रद्धा भाव से किया। कुछ समय बाद, विदर्भ नरेश के बड़े राजकुमार की मुलाकात अंशुमती से हुई, और दोनों विवाह के लिए सहमत हो गए। अंशुमती के पिता ने गंदर्भ नरेश के खिलाफ युद्ध में राजकुमारों की मदद की, जिससे उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त हुई।
प्रदोष व्रत के प्रभाव से राजकुमारों को उनका खोया हुआ राजपाट पुनः मिल गया। इसके बाद, उन राजकुमारों ने ब्राह्मणी को दरबार में विशेष स्थान प्रदान किया, जिससे उसकी गरीबी दूर हो गई और वह शिव भक्ति में लीन हो गई।
यह कथा प्रदोष व्रत के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है और यह बताती है कि इस व्रत का पालन करने से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है।