Hindu Religious
अध्याय 15: मूल बातों की ओर लौटना
अध्याय 15 उल्टे वृक्ष का उदाहरण देता है जो बताता है कि जीवन उलझ जाता है जब मन तात्कालिक आकर्षणों में...
अध्याय 18: अपनी राह को समझना
अंतिम अध्याय पूरे ज्ञान को समेटता है। कृष्ण बताते हैं कि सच्चा संन्यास काम छोड़ना नहीं, बल्कि परिणाम...
अध्याय 14: तीन प्रवृत्तियों का प्रभाव
अध्याय 14 में कृष्ण तीन प्रवृत्तियों का वर्णन करते हैं। एक स्पष्टता की ओर ले जाती है। एक बेचैनी की ओ...
अध्याय 13: स्वयं और दुनिया को समझना
अध्याय 13 आत्मा और शरीर मन को अलग पहचानने की शिक्षा देता है। शरीर और मन अनुभवों का क्षेत्र हैं। आत्म...
अध्याय 12: सरल और सच्ची भक्ति का मार्ग
अध्याय 12 भक्ति की व्यावहारिक परिभाषा देता है। भक्ति रीतियों तक सीमित नहीं है। यह सरल विश्वास, दयालु...
अध्याय 11: व्यापक दृष्टि
अध्याय 11 में कृष्ण अर्जुन को विराट रूप दिखाते हैं। अर्जुन देखता है कि पूरी सृष्टि एक ही प्रवाह में ...
अध्याय 10: रोज़मर्रा में उत्कृष्टता को पहचानना
अध्याय 10 में कृष्ण बताते हैं कि दुनिया के श्रेष्ठ गुणों में दिव्यता की झलक है। शक्ति, ज्ञान, धैर्य ...
अध्याय 9: सच्ची निष्ठा की कीमत
अध्याय 9 में कृष्ण अर्जुन से सरल और स्नेहपूर्ण स्वर में बात करते हैं। वे बताते हैं कि ईमानदारी और नि...
अध्याय 7: क्या सच में मायने रखता है
अध्याय 7 में कृष्ण बताते हैं कि जीवन की दिशा तब साफ होती है जब व्यक्ति मूल बातों को समझता है। वरना म...
अध्याय 8: मन को स्थिर बनाना
अध्याय 8 में कृष्ण बताते हैं कि मन की स्थिति जीवनके हर अनुभव को प्रभावित करती है। स्थिर मन चुनौतियों...









