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शारदीय नवरात्रि 2026 दिन 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, कथा और आरती

शारदीय नवरात्रि 2026 का दूसरा दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को धैर्य, तप, संयम और आत्मबल की प्रेरणा प्राप्त होती है।
मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और साधना की देवी माना जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं, मां को प्रिय भोग अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि के दूसरे दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, भोग, पौराणिक कथा और आरती।
शारदीय नवरात्रि 2026 दिन 2 का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के दूसरे दिन द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। पूजा के लिए शुभ समय का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
- तारीख: 12 अक्टूबर 2026, सोमवार
- तिथि: आश्विन शुक्ल द्वितीया
- देवी: मां ब्रह्मचारिणी
- द्वितीया तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026, रात 9:32 बजे
- द्वितीया तिथि समाप्त: 12 अक्टूबर 2026, रात 10:14 बजे
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
ध्यान दें कि शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।
- मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- मां को फूल, अक्षत, रोली और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
- मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें।
- देवी को चीनी, मिश्री, दूध या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
- मां की कथा पढ़ें और आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें तथा प्रसाद वितरित करें।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा भक्त दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत का भोग भी लगा सकते हैं।
मां को दूध की खीर, पेड़े और अन्य सात्विक मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। भोग में स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है।
कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी?
मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उनका नाम तपस्या, साधना और ब्रह्मचर्य के पालन से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
मां का स्वरूप अत्यंत शांत, तेजस्वी और दिव्य माना जाता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। उनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और आत्मसंयम का पालन करने की प्रेरणा देता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया था। नारद मुनि के उपदेश से उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करने का संकल्प लिया।
कहा जाता है कि देवी ने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया। शुरुआत में उन्होंने फल और कंद-मूल का सेवन किया। इसके बाद वे केवल पेड़ों से गिरे हुए बिल्व पत्र खाकर तपस्या करने लगीं। बाद में उन्होंने बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया और निर्जल तथा निराहार रहकर भगवान शिव की आराधना जारी रखी।
देवी की कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर अत्यंत क्षीण हो गया। उनकी अटूट श्रद्धा और समर्पण देखकर देवताओं तथा ऋषि-मुनियों ने उनकी प्रशंसा की। अंततः उनकी तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
इसी कठिन तपस्या के कारण देवी को मां ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। उनकी कथा से यह संदेश मिलता है कि धैर्य, दृढ़ संकल्प और सच्ची निष्ठा से कठिन लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
1. मां ब्रह्मचारिणी का सरल मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
2. मां ब्रह्मचारिणी स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3. मां ब्रह्मचारिणी ध्यान मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करके भक्त मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करते हैं और उनसे धैर्य, ज्ञान तथा आत्मबल की कामना करते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने॥
रुद्राक्ष की माला लेकर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा देकर॥
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी॥
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों को धैर्य, तपस्या और आत्मसंयम का महत्व समझाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करते समय भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता, दृढ़ संकल्प और मानसिक शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
इस पावन अवसर पर मां की पूजा करें, मंत्रों का जाप करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें।
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