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श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस 2026: आस्था, भक्ति और गौरव का महापर्व
श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा का दिव्य महत्व
भगवान श्रीराम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में जन्म लेकर उन्होंने धर्म, सत्य और करुणा का आदर्श प्रस्तुत किया।
जहाँ एक ओर श्रीराम अपने वीर स्वरूप के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनका बाल रूप – श्री रामलला अत्यंत कोमल, दिव्य और पूजनीय माना जाता है। यह रूप स्वयं भगवान शिव और काकभुशुंडी ऋषि द्वारा भी पूजित है।
अयोध्या और श्री रामलला का ऐतिहासिक महत्व
अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहाँ प्राचीन काल से ही श्रीराम मंदिर स्थित था, जिसे विदेशी आक्रमणों के दौरान ध्वस्त कर दिया गया।
लगभग 500 वर्षों के संघर्ष, आस्था और तपस्या के बाद,
22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
तभी से यह पावन तिथि हर वर्ष श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है।
श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस 2026
वर्ष 2026 में यह पावन दिन एक बार फिर भक्तों को प्रभु श्रीराम से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
इस दिन:
* श्रीराम पूजन किया जाता है
* राम नाम का जप होता है
* हवन एवं दीपदान किया जाता है
* घरों और मंदिरों में भव्य सजावट होती है
* यह दिन धर्म, आस्था और सनातन संस्कृति की विजय का प्रतीक है।
आध्यात्मिक संदेश
* श्री रामलला हमें सिखाते हैं कि:
* सत्य की हमेशा विजय होती है
* धैर्य और श्रद्धा का फल अवश्य मिलता है
* धर्म का मार्ग ही जीवन का सही मार्ग है
घर बैठे श्रीराम पूजा कैसे कराएं?
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