Hindu Religious

नवरात्रि का पाँचवां दिन 2026: माँ स्कंदमाता – मातृत्व, संरक्षण, ज्ञान और दिव्य करुणा का अद्भुत स्वरूप

नवरात्रि का पाँचवां दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित होता है, जो माँ दुर्गा का पाँचवां स्वरूप हैं। वे मातृत्व, प्रेम, करुणा और संरक्षण की दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं। माँ स्कंदमाता को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता के रूप में पूजा जाता है, जो देवताओं के सेनापति माने जाते हैं।

‘स्कंदमाता’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है — स्कंद (भगवान कार्तिकेय) और माता (माँ)। इस प्रकार, वे केवल एक देवी ही नहीं, बल्कि मातृत्व की सर्वोच्च शक्ति और स्नेह का प्रतीक हैं।

 पौराणिक कथा और महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब असुर तारकासुर ने अत्याचार बढ़ा दिए, तब भगवान कार्तिकेय ने उसका वध किया। माँ स्कंदमाता ने अपने पुत्र का पालन-पोषण अत्यंत प्रेम और संस्कारों के साथ किया और उसे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

उनका स्वरूप यह दर्शाता है कि एक माँ अपने पुत्र को केवल जन्म ही नहीं देती, बल्कि उसे जीवन में सही मार्ग पर चलने की शक्ति भी देती है। माँ स्कंदमाता का पूजन करने से भक्तों को मातृत्व का आशीर्वाद, संतान सुख और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।

 स्वरूप और प्रतीकात्मकता

माँ स्कंदमाता को कमल के फूल पर विराजमान दिखाया जाता है, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। कमल का फूल पवित्रता, आध्यात्मिकता और ज्ञान का प्रतीक है।

उनके चार हाथ होते हैं —

दो हाथों में वे कमल पुष्प धारण करती हैं

एक हाथ में बाल स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में लिए रहती हैं

चौथे हाथ से वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं

वे सिंह पर सवार होती हैं, जो साहस और शक्ति का प्रतीक है। उनका शांत और करुणामयी स्वरूप भक्तों को मानसिक शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

 आध्यात्मिक महत्व और पूजा विधि

नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान, समृद्धि, सुख और शांति की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस दिन का शुभ रंग पीला या नारंगी माना जाता है, जो ऊर्जा, उत्साह और आनंद का प्रतीक है। भक्त इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं और माँ को केले तथा मिठाइयों का भोग लगाते हैं।

माँ स्कंदमाता की पूजा करने से मन की शुद्धि होती है और भक्त आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

 आधुनिक जीवन में महत्व

आज के समय में माँ स्कंदमाता का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे हमें सिखाती हैं कि जीवन में प्रेम, धैर्य और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

उनका मातृत्व हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने परिवार, समाज और कर्तव्यों के प्रति सजग रहें। वे हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति केवल बाहरी नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और त्याग में निहित होती है।

मंत्र:
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः 🙏

👉 आज ही Panditjee App डाउनलोड करें
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.cliqindia.pandit_jee_app&hl=en_IN

Panditjee
Author: Panditjee

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *