Blog
कृष्ण परशुराम द्वादशी 2026: भगवान विष्णु के अवतार परशुराम की पूजा से मिलता है सुख और मोक्ष

कृष्ण परशुराम द्वादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पुण्यदायी व्रत है, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम को समर्पित है। यह व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की परशुराम द्वादशी के लगभग पंद्रह दिन बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत मई माह में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि तक रहेगी। व्रत का पारण 14 मई को सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि के भीतर पारण करना अत्यंत आवश्यक होता है।13 मई 2026 को दोपहर 1:29 बजे से प्रारंभ होकर 14 मई 2026 को सुबह 11:20 बजे
कृष्ण परशुराम द्वादशी का महत्व भगवान परशुराम की पूजा और उनके आदर्शों से जुड़ा हुआ है। भगवान परशुराम को धर्म की रक्षा करने वाले और अधर्म का नाश करने वाले योद्धा के रूप में जाना जाता है। वे भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार को समाप्त करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था।
शास्त्रों में द्वादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। कई ऋषि-मुनियों और विद्वानों ने इसे एकादशी व्रत के समान ही फलदायी बताया है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है, और अंत में उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा वीरसेन संतान सुख से वंचित थे। उन्होंने द्वादशी व्रत का पालन किया और भगवान विष्णु की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। यह कथा इस व्रत की शक्ति और फलदायकता को दर्शाती है।
इस व्रत को करने की विधि सरल है। भक्तजन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। भगवान विष्णु और परशुराम जी की पूजा की जाती है। पूजा में फूल, तुलसी पत्र, फल और दीप अर्पित किए जाते हैं। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्रत रखने वाले दिनभर उपवास करते हैं और भक्ति में समय बिताते हैं। कई लोग फलाहार करते हैं, जबकि कुछ केवल जल पर व्रत रखते हैं। इस दिन सात्विकता और संयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
व्रत का पारण अगले दिन सुबह द्वादशी तिथि के भीतर किया जाता है। पारण से पहले ब्राह्मण को भोजन या दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कृष्ण परशुराम द्वादशी हमें यह सिखाती है कि धर्म, अनुशासन और भक्ति जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं। यह दिन हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
अंततः, यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है। भगवान परशुराम और विष्णु की कृपा से व्यक्ति को जीवन में सफलता, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यदि आप भी व्रत, पूजा या कुंडली से संबंधित मार्गदर्शन चाहते हैं, तो Panditjee.com App के माध्यम से अनुभवी पंडितों से आसानी से जुड़ सकते हैं।
👉 डाउनलोड करें: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.panditjee.app
